इक काव्य कहानी - ' पुरा प्रेम '
" पुरा प्रेम "
अब मेरे संग रहना उसे सहा ना गया ।
वो तड़प छुपाता रहा मेरी मुस्कुराहटो के लिए
उसका तड़पना मुझे सहा ना गया ।
कहानी कुछ ऐसी है ;
मैं अंजाने में बेवफ़वा निकली
अब मेरा वफ़ा बेवफ़ा बाद होना, उसे सहा ना गया ।
ख़ामोशी से वो जुल्म सहता रहा
तड़पता और बस चलता रहा...
लुटा देता वो सबकुछ अपना मेरे कदमों में
लेकिन ; माँ का फ़टी साड़ी में रहना उसे सहा ना गया ।
बरसते बादल , तूफानी हवा और घटाओ का बहाव
क्या खूब रात थी वो
वो आज़ाद पंछी की तरह उड़ गया.....
उसका पिंजरे में रहना अब मुझे सहा ना गया ।
घर अलग हो गया
पिंजरा टूट गया
वो पंछी भी ओझल हो गया
और मैं सन्नाटे में चली गई
अब मेरा शांत होना मुझे ही सहा ना गया ।
अब मेरे संग रहना उसे सहा ना गया ।
उसका तड़पना मुझे सहा ना गया।
अब मेरे संग रहना ; उसे सहा ना गया !
अब ; मेरे संग रहना उसे सहा ना गया.....
~ इक कल्पित काव्य ' कहानी '
~ indiandarshiki : Shivani
*Part of Indiandarshiki: inner light in poetic shadows*



टिप्पणियाँ