⛈️ मेरी बारिश




⛈️ मेरी बारिश 


मेरी बारिश आज मुझे इल्म से भर देगी,

वो बैठेगी मेरे रोम में,

मुझमें मोम कर देगी।


ये शील-सा दिल —

अब और सख़्त होगा,

फिर भी, वो

एक कोना खाली कर देगी।


ज़माना ज़ालिम हो तो,

रक़ीब हुस्न फरमाए,

ये मुस्कुराएगी —

फिर चीखेगी, सिहर देगी।


मेरी बारिश —

कभी तो मुझे एक बूंद देगी,

उसने समझा,

भीग गई शिवानी...


आज —

मेरे रोने पे हँसी होगी,

कभी तो

मेरे हँसने पे हँसेगी,

रोने पे रोएगी।


वो फिर बैठेगी —

मेरे रोम में,

मुझमें मोम कर देगी।


indiandarshiki 



* Part of Indiandarshiki : inner light in poetic shadows * 

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